Badaun Politics : बदायूं की धरती से उठी किसानों की सिसकी अब सत्ता के गलियारों में गूंजने लगी है। दिल्ली जाने वाली नई रेलगाड़ी के शुभारंभ पर जहां विकास की नई पटरियां बिछ रही थीं, वहीं सदर विधायक महेश चंद्र गुप्ता ने शेखुपुर चीनी मिल की जर्जर हालत का मुद्दा उठाकर किसानों के जख्मों पर मरहम लगाने की कोशिश की। भावनाओं और क्षेत्रीय स्वाभिमान से भरे उनके संबोधन ने मंच पर बैठे दिग्गजों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि किसानों की खुशहाली के बिना विकास का हर इंजन अधूरा है।
कार्यक्रम के दौरान विधायक महेश चंद्र गुप्ता का अंदाज़ बेहद भावनात्मक और तेवर धारदार रहे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि शेखुपुर चीनी मिल महज़ ईंट-पत्थरों का कोई निर्जीव ढांचा नहीं है, बल्कि यह जिले के हजारों किसान परिवारों की उम्मीदों और उनकी आजीविका का मुख्य केंद्र है। मिल की बदहाली पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने मंच से कड़वा सच साझा किया कि संसाधनों के अभाव में क्षेत्रीय किसानों ने गन्ने की खेती से किनारा कर लिया है, जिसका सीधा और घातक प्रहार उनकी आर्थिक स्थिति पर पड़ा है।
मंच पर मौजूद केंद्रीय राज्यमंत्री बी.एल. वर्मा की ओर मुखातिब होते हुए विधायक जी ने पुरजोर शब्दों में मिल के पुनरुद्धार की मांग रखी। उन्होंने तर्क दिया कि जब तक अन्नदाता सशक्त नहीं होगा, तब तक क्षेत्र के समग्र विकास का सपना अधूरा ही रहेगा। विधायक ने भावुक स्वर में कहा, हमारे किसान आज भी उम्मीद भरी नज़रों से सरकार की ओर देख रहे हैं, उनका यह विश्वास टूटना नहीं चाहिए।" उनके इस ओजस्वी संबोधन को वहां उपस्थित जनसमूह ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ जबरदस्त समर्थन दिया। अंत में, उन्होंने पूर्ण विश्वास जताया कि केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए शेखुपुर मिल के कायाकल्प पर जल्द ही कोई ऐतिहासिक और सकारात्मक निर्णय लेगी।

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